सुनता है गुरु ज्ञानी ज्ञानी ज्ञानी
गगन में आवाज हो रही झीनी-झीनी झीनी-झीनी
सुनता है गुरु ज्ञानी
पहिले आए आए पहिले आए
नाद बिंदु से पीछे जमया पानी पानी हो जी
सब घट पूरण गुरु रह्या है
अलख पुरुष निर्बानी हो जी ll 1 ll
सुनता है गुरु ज्ञानी
सुनता हैं गुरु ज्ञानी ज्ञानी ज्ञानी ज्ञानी
गगन में आवाज हो रही झीनी-झीनी झीनी-झीनी
वहां से आया पता लिखाया
तृष्णा तूने बुझाई बुझाई..
अमृत छोड़सो विषय को धावे,
उलटी फाँस फंसानी हो जी ll 2 ll
सुनता है गुरु ज्ञानी
सुनता हैं गुरु ज्ञानी ज्ञानी ज्ञानी ज्ञानी
गगन में आवाज हो रही झीनी-झीनी झीनी-झीनी
गगन मंडलू में गौ
भोई से दही जमाया जमाया…
माखन माखन संतों ने खाया,
छाछ जगत बापरानी हो जी … ll 3 ll
सुनता हैं गुरु ज्ञानी ज्ञानी ज्ञानी ज्ञानी
गगन में आवाज हो रही झीनी-झीनी झीनी-झीनी
बिन धरती एक मंडल दीसे,
बिन सरोवर जूँ पानी रे
गगन मंडलू में होए उजियाला,
बोल गुरु-मुख बानी हो जी ll 4 ll
सुनता हैं गुरु ज्ञानी ज्ञानी ज्ञानी ज्ञानी
गगन में आवाज हो रही झीनी-झीनी झीनी-झीनी
ओऽहं सोऽहं बाजा बाजे,
त्रिकुटी धाम सुहानी रे
इडा पिंगला सुषुमना नारी,
सून ध्वजा फहरानी हो जी ll 5 ll
सुनता हैं गुरु ज्ञानी ज्ञानी ज्ञानी ज्ञानी
गगन में आवाज हो रही झीनी-झीनी झीनी-झीनी
कहत कबीरा सुनो भई साधो,
जाय अगम की बानी रे..
दिन भर रे जो नज़र भर देखे,
अजर अमर वो निशानी हो जी … ll 6 ll
सुनता हैं गुरु ज्ञानी ज्ञानी ज्ञानी ज्ञानी
गगन में आवाज हो रही झीनी-झीनी झीनी-झीनी
|
हर व्यक्ति अपना गूरू हैं और समय समय पर ज्ञान अर्जित करता रहता है और वह चाहे तो अपने शरीर में हो रही औम आवाज को सुन सकता है चाहे वह कितनी भी कम हो ।
आत्मा का सृजन से भी पहले उसकी प्रकृति निधारित होती हैं अतः तभी से निरंतर प्रयास करना चाहिए ताकि ज्ञानी परमात्मा को समझकर यह जान जाऐ कि वह अनदेखा ही अनुभव हैं और वही ज्ञान देकर मुक्ति दे सकता है ।।
यह ज्ञान हर व्यक्ति को अपने अंर्तमन को सुनकर मिलता है ।।
मैं जब इस विश्व मे आया तो मुझे नाम मिला, पहचान मिली और मैं सांसारिक सुखों को उपभोग मे लग गया, इच्छाओं की पूर्ति मेरे जीवन का ध्येय बन गया और एक दिन मैं इस तथ्य को समझा तब तक मैनै अपना जीवन इतना उलझा लिया कि यह सब साधन जिनके लिए मैंने अपना जीवन व्यर्थ गवाँ दिया मुझे कांटों की तरह काटते हैं । अगर मैं अपने अंर्तमन को सुन लेता तो आज इस तरह दुखी न होता ।।
दिन रात परिश्रम करके मैनै जो कुछ हासिल किया उससे जो ज्ञान मिला वह थोड़ा सा है और उससे मुझे मानसिक शांति और संतोष मिला और बाकी सब कुछ जो मिला वह मेरे कुछ काम न आया
[31/01, 19:55] Arun
Sharma: मैं सम्पूर्ण जीवन मिथ्या के आलिंगन में रहा और सस्ते में ही जीवन व्यतीत कर दिया । अंतमुर्खी ज्ञान को अनसुना करके अब पछतावा व्यर्थ है ।।
बिना ज्ञान सुख मिले यह जीवन ऐसा हैं जैसे बिना पृथ्वी के ब्रह्मांड या बिना पानी के झरना या झील , इस शरीर की आभा निराली हो जाती हैं जब इसमे परमात्मा की ज्ञान रुपी ज्योति प्रगट होकर मुखारविंद हो जाती हैं । अतः अपने अंर्तात्मा को कमजोर मत होने दो ।।
काशी तीर्थ की छटा विस्मरणीय हैं, हर जगह मंत्र और यज्ञ हो रहे हैं , एक ऐसी ऊर्जा का संचार हो रहा है जिससे मानव शरीर मे चेतना उत्पन्न हो रही हैं जो बारम्बार परमात्मा के साथ होना इंगित कर रही हैं। परमात्मा के अस्तित्व को अनुभव करने के लिए अपने हृदय की आवाज को सुनना ही परम लक्ष्य है।।
कबीर कहते हैं जो कुछ मैने अभी तक कहा है वह कोई मुश्किल कार्य नहीं है औय नाही कुछ नया है, यह सब तो अनंत समय से हमारे साथ ही है सिर्फ अनुभव करना है । अतः अंतर हृदय मे जाकर परमात्मा को प्राप्त कर लो ।।
|